Tuesday, 21 July 2026

संसार दान से चलता है - रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य जी

 दान की किसको जरूरत नहीं है? आप अपनी लेखनी की रोटी खा रहे हैं, हम दान की रोटी खा रहे हैं, लेकिन आपमें और हममें कोई अंतर नहीं है। दोनों को दान की जरूरत है। पत्‍नी कहीं से दान में आई है या कोई बहन है आपकी? यदि बहन से शादी कर लिए होते, तो आज यहां कोई बैठने देता क्या? दरवाजा बंद कर दिया जाता। माता-पिता ही बाहर कर देते, समाज में सब थू-थू करते। दान है, कन्यादान प्राप्‍त हुआ है, किसी ने अपनी बेटी आपको दान की। जो आपके घर में बैठकर आपके बच्चों को संभाल रही है, आपके घर को संभाल रही है, हर व्‍यक्‍त‍ि दान से चलता है। यह संसार दान से चलता है।

ये जो आप सांस ले रहे हैं, आपके पिता जी का ऑक्सीजन है क्या? रतन टाटा भी ऑक्सीजन का बिल नहीं भरते हैं, अंबानी भी बिल नहीं भरते हैं? दान हुआ। आकाश हमारे पिता जी के द्वारा निर्मित है क्या? किसी ने दान किया है। हम ले रहे हैं, लेकिन लौटा नहीं रहे हैं। जिसने वायु, चंद्रमा, आकाश और सब कुछ दिया, जिसको हम सुप्रीम पावर कहते हैं, उसी ने वेद दिए। माना जाता है, वेद सृष्‍टि के साथ हमेशा चलते रहते हैं। वे ऐसे हैं, जिनका कभी नाश नहीं होता। अपने जीवन और संसार में दान की महिमा को ठीक से समझना चाहिए।

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