जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामनरेशाचार्यजी महाराज

धर्म के ज्ञान से ही व्यक्ति को जीने की कला आती है.

Saturday, 24 November 2018


Posted by Jai Siyaram at 06:49
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Labels: swami Ramnareshacharya ji, जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य जी

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जय श्री राम दरबार / Jai Shri Ram Court

जय श्री राम दरबार / Jai Shri Ram Court
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन...

जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी महाराज

जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी महाराज
जात पात पूछे नहीं कोई

जगद्गुरु रामानंदाचार्य

जगद्गुरु रामानंदाचार्य
स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य जी महाराज / Swami Shri Ramnareshacharya ji

महाराज विराजमान - श्रीमठ पंचगंगा घाट, वाराणसी

दिव्य चातुर्मास महायज्ञ, श्रीविहारम, वाराणसी

महाराज के दर्शन-प्रवचन के लिए यहां क्लिक कीजिए

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जगद्गुरु रामानंदाचार्य

जगद्गुरु रामानंदाचार्य

श्री राम जय राम जय जय राम

श्री राम जय राम जय जय राम

आओ, जीवन सीखा दूँ / Come, let's learn life

आओ, जीवन सीखा दूँ / Come, let's learn life
पंचम प्रवचन पुस्तिका

अबलौं नसानी, अब न नसैहौं

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चतुर्थ प्रवचन पुस्तिका

साधु कौन? / Who is Monk?

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तृतीय प्रवचन पुस्तिका

अच्छा कैसे सोचा जाये ? / How to think good?

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द्वितीय प्रवचन पुस्तिका

दुःख क्यों होता है? / Why does sadness happen?

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प्रथम प्रवचन पुस्तिका

जगदगुरु रामानंदाचार्य श्री रामनरेशाचार्य जी

जगदगुरु रामानंदाचार्य श्री रामनरेशाचार्य जी
वन्दे गुरु परम्पराम

साधु का मतलब ही यही है कि वह अपनी संपूर्ण ऊर्जा दूसरों के लिए लगा दे

साधु का मतलब ही यही है कि वह अपनी संपूर्ण ऊर्जा दूसरों के लिए लगा दे

मंगलगीतम

श्रितकमलाकुचमण्डल धृतकुण्डल ए।
कलितललितवनमाल जय जय देव हरे।।
दिनमणिमण्डलमण्डन भवखण्डन ए।
मुनिजनमानसहंस जय जय देव हरे। श्रित..।
कालियविषधरगंजन जनरंजन ए।
यदुकुलनलिनदिनेश जय जय देव हरे। श्रित..।
मधुमुरनरकविनाशन गरुडासन ए।
सुरकुलकेलिनिदान जय जय देव हरे। श्रित..।
अमलकमलदललोचन भवमोचन ए।
त्रिभुवनभवननिधान जय जय देव हरे। श्रित..।
जनकसुताकृतभूषण जितदूषण ए।
समरशमितदशकण्ठ जय जय देव हरे। श्रित..।
अभिनवजलधरसुन्दर धृतमन्दर ए।
श्रीमुखचन्द्रचकोर जय जय देव हरे।। श्रित..।
तव चरणे प्रणता वयमिति भावय ए।
कुरु कुशलं प्रणतेषु जय जय देव हरे। श्रित..।
श्रीजयदेवकवेरुदितमिदं कुरुते मृदम्।
मंगलमंजुलगीतं जय जय देव हरे। श्रित..।

(श्री जयदेव रचित यह आरती जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य जी को अत्यंत प्रिय है। विशेष पूजा के अवसर पर आप इसी आरती को बड़ी भक्ति भाव से मीठे स्वर में गाते-गवाते हैं)

जब कोई पुरुषार्थी होगा, तो मनोरथ पूरे होंगे।

जब कोई पुरुषार्थी होगा, तो मनोरथ पूरे होंगे।

जीवन मानवता के लिए वरदान होना चाहिए। धर्म के माध्यम से ज्ञान, शक्ति भी चाहिए

जीवन मानवता के लिए वरदान होना चाहिए। धर्म के माध्यम से ज्ञान, शक्ति भी चाहिए

आज जो अभाव दिख रहा है, एक दूसरे को सहन नहीं करने से उपजा अभाव है

आज जो अभाव दिख रहा है, एक दूसरे को सहन नहीं करने से उपजा अभाव है

हमने धन बल को बढ़ाया, तप बल को नहीं बढ़ाया, इसलिए देश पराजित हो गया

हमने धन बल को बढ़ाया, तप बल को नहीं बढ़ाया, इसलिए देश पराजित हो गया

श्री राम जय राम जय जय राम

श्री राम जय राम जय जय राम

श्री राम जय राम जय जय राम

श्री राम जय राम जय जय राम

जाऊं कहाँ तजि चरण तम्हारे

जाऊं कहाँ तजि चरण तम्हारे

श्री राम जय राम जय जय राम

श्री राम जय राम जय जय राम

ओम जय जगदीश हरे

ओम जय जगदीश, स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का
सुख-सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति

दीनबंधु दुःखहर्ता, तुम रक्षक मेरे.
करुणा हस्त बढ़ाओ, द्वार पडा तेरे

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा

ओम जय जगदीश, स्वामी जय जगदीश हरे

पं. श्रद्धाराम शर्मा (या श्रद्धाराम फिल्लौरी) (१८३७-२४ जून १८८१) लोकप्रिय आरती ओम जय जगदीश हरे के रचयिता हैं। इस आरती की रचना उन्होंने १८७० में की थी।

श्री राम जय राम जय जय राम 2

श्री राम जय राम जय जय राम 2

गुरु चरण मिलेला बड़ी भाग से

गुरु चरण मिलेला बड़ी भाग से
जाहूं हम जनतीं गुरुजी हमार आएब रामा
चरण पखरतीं अपना हाथ से
गुरु चरण मिलेला बड़ी भाग से
जाहूं हम जनतीं गुरुजी हमार आएब रामा
आसन लगइतीं अपना हाथ से
गुरु चरण मिलेला बड़ी भाग से
जाहूं हम जनतीं गुरुजी हमार आएब रामा
भोगवा बनइतीं अपना हाथ से
गुरु चरण मिलेला बड़ी भाग से
जाहूं हम जनतीं गुरुजी हमार आएब रामा
पनियां छनइतीं अपना हाथ से
गुरु चरण मिलेला बड़ी भाग से
जाहूं हम जनतीं गुरुजी हमार आएब रामा
आरती उतरतीं अपना हाथ से
गुरु चरण मिलेला बड़ी भाग से।

यह केवल प्रारंभ है

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रामानंदाचार्य जगद्गुरु स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य जी महाराज विश्व की अनुपम धर्मनगरी काशी के पूजनीय वैष्णव संत। काशी अर्थात वाराणसी में श्रीमठ, पंचगंगा घाट स्थित रामानंद संप्रदाय की मूल पीठ के आचार्य - रामानंदाचार्य। बिहार प्रांत के भोजपुर जिला के परासिया गांव में जन्मे। प्रारंभिक स्कूली शिक्षा गांव में शुरू करने के बाद शास्त्र अध्ययन के लिए मात्र 12 वर्ष की आयु में घर छोड़ दिया। कम आयु में ही वे अपनी योग्यता, स्मरण शक्ति, साधु जीवन के कारण लोकप्रिय हो गए थे। हरिद्वार में कैलाश पीठ में दर्शन शास्त्र पढ़ाते थे। 11 जनवरी 1988 को रामानन्दाचार्य जयन्ती के पावन दिवस पर सम्प्रदाय के संतों के गरिमामय समागम के बीच आप रामानन्दाचार्य के पद पर विराजमान हुए। जात-पात पूछे नहीं कोई, हरि को भजे से हरि का होई - के सद्भावपूर्ण सिद्धांत के पालक-प्रेरक। प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने अयोध्या विवाद के समाधान के लिए रामालय ट्रस्ट बनाया था, जिसके संयोजक-संस्थापक आप बनाए गए थे। संप्रदाय के अनेक आश्रमों का उद्धार किया है और आश्रमों को अन्न क्षेत्र घोषित करने के साथ ही शास्त्र व सामान्य शिक्षा के केन्द्र के रूप में विकसित किया। आश्रम के दरवाजे किसी भी धर्म और किसी भी जाति के लोगों के लिए सदा खुले रहते हैं। समाज और संसार में रामभाव का विकास ही लक्ष्य है।
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