Saturday, 1 October 2011

गलत लोगों का बहिष्कार हो

भ्रूण हत्या केवल समाज का संतुलन ही नहीं बिगाड़ रही है, केवल शादी की समस्या ही नहीं पैदा कर रही है, आतंकवाद का विस्तार भी कर रही है, जो दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है। विचार के क्रम में मेरे मन में यह भाव भी आया कि लंका में सारे दुराचार होते थे, लूट, अत्याचार, व्यभिचार, अपहरण, लेकिन भ्रूण हत्या नहीं होती थी, आपस में वहां भाईचारा था। विभिषण का भी सम्मान था, कुम्भकर्ण का भी सम्मान था। हां, लंका में भोग की वृत्ति गलत थी।
वैसे अपने राष्ट्र में कन्या द्रोह पुराना है। राजा लोग, क्षत्रिय लोग लड़कियों को विष चटा देते थे कि किसी के सामने सिर नहीं झुकाना पड़ेगा। लडक़ी हो जाए, तो सिर झुकाना पड़ता है। राम राज्य में यह परंपरा नहीं थी। अपने देश में इंदिरा गांधी भी हुई। कहा गया, नेहरू वंश में इतनी बदसूरत, लेकिन बाद में अक्लमंद संतति उत्पन नहीं हुई। इंदिरा जी के साथ रही महिला ने उनकी जीवनी लिखी, जब उन्होंने इंदिरा की सूरत के बारे में लिखा, तो लोगों ने विरोध नहीं किया। कभी सूरत से कम रही, अक्लमंद लडक़ी विश्व की सबसे बड़ी व शक्तिशाली महिला हुई। इतने बड़े लोकतंत्र की प्रधानमंत्री रहीं। आज इंदिरा जी जैसे लोगों की जरूरत है देश को। यहां कविता पाठ करने वाला प्रधानमंत्री और केवल हिसाब-किताब करने वाला ही नहीं चलेगा। जिसकी राजनीति में गहरी पैठ नहीं है, संगठन में गहरी पैठ नहीं है, जो देश की नब्ज नहीं समझता, वह कभी सफल नहीं होगा। देश को ऐसा नेता चाहिए जो जरूरत हो, तो दो हाथ भी जमा सके।
वैसे मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि कन्या भ्रूण हत्या पर राष्ट्र को शर्म है। यह व्यक्ति का शर्म नहीं, जिला या राज्य का शर्म नहीं है, यह राष्ट्र का शर्म है। मैं बोलता हूं, यह मानवता का शर्म है। सम्पूर्ण मानवता इसके माध्यम से आतंकवादी होती जा रही है। इसे छोड़ा नहीं जा सकता कि होती है, तो होने दो। मैं इस दिशा में काम कर रहा हूं। जितने लोग हमारे साथ जुड़े हुए हैं, उनके बीच ही हम प्रचार कर रहे हैं। लोग हमारे पास आते हैं, महाराज, दो बेटियां हैं, एक बेटा हो जाता, तो हम लोग प्रयास करते हैं कि सनातन धर्म की दृष्टि से मांगने वाला का भला हो जाए। शर्त भी रखते हैं कि हमारे प्रयास के बावजूद फिर बेटी आ गई, तो उसकी हत्या नहीं होगी। ईश्वर ने बेटा नहीं दिया, तो क्या हो सकता है, जो दिया है, वह स्वीकार हो। मैंने कह रखा है कि हमसे जुड़ा कोई आदमी भ्रूण हत्या में जुड़ा, तो हमारे सामने न आए। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। हत्यारे आपके बगल में बैठे हों, तो आप तो हत्या के समर्थक हो गए न। हमारे सम्पर्क में देश के कई बड़े-बड़े बाहुबली हैं, जिन्होंने अरबों रुपयों कमाए हैं, मैं उन्हें भी कहता हूं, मुझे आपका एक रुपया भी नहीं चाहिए और आपसे सम्बंध भी नहीं चाहिए। हिंसा भाव, हत्यारों और अपराधियों से राम जी सबको दूर ही रखें, तो अच्छा है।
-समापन-

1 comment:

  1. पूज्य महाराजजी के सद्विचारों को वास्तव में प्रसारित करने की आवश्यकता है.

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