Thursday, 29 September 2011

हर कोई अपनी संपत्ति बताए

भ्रष्टाचार को खत्म करना है, उसके खिलाफ आंदोलन करना है, तो आंदोलन करने वालों को सबसे पहले अपनी संपत्ति बतानी चाहिए। संपत्ति कितनी है, कैसे बढ़ी, कितनी बढ़ी है, कहां बढ़ी। इसमें कोई बड़ी बात नहीं है, यह तरीका सही है। शरीर अचानक बढ़ जाता है, तो डॉक्टर पता लगाते हैं कि शरीर क्यों बढ़ा है, शक्ति बढ़ गई है या कोई और कारण है। उसके लिए डॉक्टर जांच करते हैं। जांच मेरी भी होनी चाहिए, पहले साइकिल भी नहीं थी, किन्तु बाद में पैसा कहां से आया, श्रीमठ में मार्बल, ग्रेनाइट लगने लगा। देश में हर आदमी को अपनी आय बतानी चाहिए। छोटा महंत भी बताए, सेठ भी बताए, रामानंदाचार्य भी बताएं, रामदेव जी को भी बतलाने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। जब भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं, तो शंका के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। वैसे भी संन्यासी का जीवन खुला होता है, कुछ भी छिपा नहीं होता। जैसे संपत्ति आई है, आप डंके की चोट पर बताइए, कहां से आई, गलत आई है, तो आप सुधार कीजिए।
संपत्ति की जांच से किसी को घबराना नहीं चाहिए, किन्तु चोर की दाढ़ी में तिनका होता है। पुलिस वाले पूछते भी नहीं हैं कि चोर के पैर हिलने लगते हैं। मैंने पुलिस वालों से पूछा कि आप चोरों को भीड़ में से कैसे पकड़ लेते हो, जवाब मिला कोई कठिन बात नहीं है, हमें सामने देखते ही उनके हाव-भाव बदल जाते हैं, पैर हिलने लगते हैं। जैसे ओझा को देखते ही भूत चिल्लाने लगता है। जो सही वह कभी नहीं घबराता।
हर किसी का उत्तरदायित्व होना चाहिए। आप देश की सुविधाओं का उपयोग वैसे ही करते हैं, जैसे आम आदमी करता है, आपके लिए अलग से कुछ नहीं है, पूरा भारतीय संविधान आप पर लागू होता है। संपत्ति के मामले में हर किसी को साफ-सुथरा होना चाहिए। जिसको भी आंदोलन में उतरना है, वह पहले अपना दामन साफ रखे।
यह कोई कांग्रेस की बात नहीं है, यह नीति की बात है। भ्रष्टाचार के मामले में रामराज्य के सूत्र को अपनाया जाए। जिसके आचरण में पवित्रता नहीं होगी, उसका अर्थ पवित्र नहीं होगा और जिसका अर्थ पवित्र नहीं होगा, उसका आचरण भी पवित्र नहीं होगा।
(जगदगुरु के एक प्रवचन से)

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